पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहले से ही राजनीतिक दबाव झेल रही पार्टी को अब अपनी वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे का सामना करना पड़ा है। ममता बनर्जी की करीबी सहयोगियों में मानी जाने वाली चंद्रिमा ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना है कि जब उनकी वफादारी और ईमानदारी पर सवाल उठाया गया, तो उन्हें गहरा आघात पहुंचा और उसी के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि हाल ही में हुए घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें फोन कर फटकार लगाई और यह कहा कि उन्होंने पार्टी मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ विद्रोही गुट के हवाले कर दिया। इस आरोप से वह बेहद आहत हुईं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा पूरी निष्ठा के साथ पार्टी और ममता बनर्जी का साथ दिया, लेकिन जब उनकी नीयत पर ही सवाल खड़े किए गए तो उनके लिए पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया।
इस्तीफे के बाद चंद्रिमा ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने भारी मन से यह निर्णय लिया है और अब दोबारा कालीघाट जाकर ममता बनर्जी से मिलने का भी कोई सवाल नहीं उठता। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने केवल प्रदेश अध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा सौंप दिया है।
गौरतलब है कि जून 2026 में चंद्रिमा भट्टाचार्य को TMC का पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उनके इस्तीफे को ऐसे समय में बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जब पार्टी पहले ही बागी गुट की चुनौती और संगठन पर नियंत्रण को लेकर संकट का सामना कर रही है। ऐसे में चंद्रिमा का अलग होना TMC की अंदरूनी कलह और बढ़ती राजनीतिक मुश्किलों का संकेत माना जा रहा है।
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चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सुनाई दिल की बात, बोलीं- वफादारी पर सवाल बर्दाश्त नहीं हुआ
Source: Pulse-24